मेट्रो विस्तार संघर्ष समिति ने नए पैंतरे से जीडीए-सरकार दोनों की बढ़ेंगी मुश्किलें

  • टीएचए के प्रमुख कॉलोनियों को जोड़ने के अलावा मुख्य शहर की प्रमुख कॉलोनियों और औद्योगिक क्षेत्रों को भी मेट्रो संरचना से जोड़ने की जरूरत है। इसलिए अब यह मुद्दा मेट्रो विस्तार संघर्ष समिति ही नहीं, बल्कि आम आदमी का मुद्दा बन चुका है।

कमलेश पांडेय
गाजियाबाद। मेट्रो विस्तार संघर्ष समिति अब अपने आंदोलन को घर-घर पहुंचाएगी, ताकि यहां के लोगों की मूलभूत सुविधा बन चुकी मेट्रो के सघन विस्तार हेतु सरकार पर दबाव बनाया जा सके। समिति अध्यक्ष अमित किशोर ने बताया कि मेट्रो विस्तार ना होने से जनता में भारी आक्रोश है और जब तक यह विस्तार पूर्ण नहीं हो जाता, आंदोलन जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि मेट्रो विस्तार संघर्ष समिति घर घर जाकर जीडीए के लिए भिक्षा स्वरूप सिर्फ सिक्का मांगेगी, ताकि इस गम्भीर मुद्दे पर जनजागृति पैदा हो और मेट्रो विस्तार के लिए ज्यादा से ज्यादा फंड जुट सके, जिसको समिति द्वारा जीडीए उपाध्यक्ष को सुपुर्द कर दिया जाएगा, ताकि वह अपनी ओर से सकारात्मक पहल करें और फंड का रोना नहीं रोएं। उन्होंने बताया कि समिति ने यह स्पष्ट किया है कि जीडीए जनता के साथ धोखा कर रहा है। मेट्रो जैसी मेट्रोपोलिटन परिवहन सुविधा के लिए उसके पैसे ना होना सिर्फ एक बहाना है।

उन्होंने आगे बताया कि दिल्ली-एनसीआर के मध्यमवर्गीय परिवार के लिए मेट्रो सुविधा किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि यह आरामदायक, प्रदूषण रहित और सुरक्षित यात्रा की गारंटी के साथ-साथ समय की भी बचत करता है। इसलिए गाजियाबाद में इसके विस्तार की जरूरत है। टीएचए के प्रमुख कॉलोनियों को जोड़ने के अलावा मुख्य शहर की प्रमुख कॉलोनियों और औद्योगिक क्षेत्रों को भी मेट्रो संरचना से जोड़ने की जरूरत है। इसलिए अब यह मुद्दा मेट्रो विस्तार संघर्ष समिति ही नहीं, बल्कि आम आदमी का मुद्दा बन चुका है। हमारी कोशिश सिर्फ यही है कि लोग जागें, अपना हक मांगें, नहीं मिले तो छिनने को आगे आएं, लेकिन हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठें, अन्यथा आने वाली पीढ़ी आपको माफ नहीं करेगी। आप लोग यदि हुंकार भरेंगे तो यह सरकार जल्दी सुन लेगी, अन्यथा सोयी रहेगी। उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि अपने अपने जनप्रतिनिधियों के ऊपर भी दबाव बनाएं, ताकि इस मुद्दे को जल्द मनवाया जा सके।

उन्होंने बताया कि गत रविवार को ही मेट्रो विस्तार संघर्ष समिति की एक बैठक का आयोजन किया आयोजन वसुंधरा सेक्टर 15 में किया गया। जिसमें यह निर्णय लिया गया कि मेट्रो विस्तार आंदोलन को आगे बढ़ाया जाये और कुछ ऐसे रचनात्मक कार्यक्रम किये-लिए जायें जिससे इस मसले पर कुम्भकरणी निंद्रा में सो रही सरकार के कान खुले। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में अपने कार्यक्रम लिए जायेंगे जिसमें मेट्रो विस्तार के लिए हर घर से भीख मांग कर सिक्के इकट्ठा करना और जीडीए चांसलर को देना, घरों पर मेट्रो विस्तार की मांग उठाना, गाजियाबाद का जीएसटी, इनकम टैक्स और घर रजिस्ट्री एकाउंट पता कर जनता को बताना, नगर विकास मंत्री और वित्त मंत्री से मुलाकात कर इस मुद्दे पर दवाब बनाना आदि शामिल है।

वहीं, मेट्रो विस्तार संघर्ष समिति के महासचिव गिरीश शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश अपने विकास के चरम पर है और जीडीए कह रहा है कि उसके पास फंड नहीं है। भारी भरकम जीएसटी, रजिस्ट्री टैक्स और इनकम टैक्स लेने के बाद जनता को यह कहना कि फंड नहीं है, अनुचित और निंदनीय है। बैठक में सोमवार से ही घर घर जाकर सिक्के इकट्ठा करना और 18 मार्च को मेट्रो स्टेशन पर भीख मांगने का कार्यक्रम तय किया गया है। इस बैठक की अध्यक्षता प्रमोद अस्थाना ने की। बैठक में पंकज शर्मा, अरुण सिंह, चंद्रशेखर शर्मा, नीरज तिवारी, अजय चौधरी, सत्येन्द्र बरनवाल, प्रमोद अस्थाना, आनंद कुमार सिंह, प्रेमकांत, उमेश पाण्डे, सुभाष चंद्र झा ने भी अपने अपने विचार व्यक्त किए और अपनी मांगों पर सरकार और प्रशासन दोनों को झुकाने का निश्चय किया।

बता दें कि मेट्रो विस्तार संघर्ष समिति ने नए पैंतरे से जीडीए-सरकार दोनों की मुश्किलें बढ़ेंगी। क्योंकि जिस तरह से समिति ने गाजियाबाद महानगर से वसूले जाने वाली भारी भरकम जीएसटी, रजिस्ट्री टैक्स और इनकम टैक्स लेने के आंकड़ो को जुटाकर जनता को बताने का निर्णय लिया है, वह सत्ताधारियों के साथ साथ प्रशासन की रीति-नीति को भी बेनकाब करने वाला होगा। इसलिए जीडीए या सरकार द्वारा जनता को यह कहना कि फंड नहीं है, अनुचित और निंदनीय दोनों है। उनकी इस टिप्पणी से पता चल रहा है कि फंड का कहीं न कहीं दुरुपयोग हो रहा है, जिसकी सोशल ऑडिट जरूरी है।

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