शराब की कीचड़ में खिला ‘मुखकमल’ आखिर मुरझा ही गया

  • जिन्होंने उठाई लुत्फ वो भी अब मुँह छिपाने लगे, क्योंकि पुलिसिया पहरा हुआ कड़ा

कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता
गाजियाबाद। कमिश्नरेट गाजियाबाद पुलिस और आबकारी विभाग गाजियाबाद की संयुक्त टीम ने जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह, पुलिस आयुक्त अजय मिश्र और आबकारी अधिकारी गाजियाबाद राकेश कुमार सिंह को विश्वास में लेकर जिस साहस से भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के महानगर कोषाध्यक्ष संयम कोहली के कथित रेस्टोरेंट में अवैध रूप से चल रहे बार के धंधे का भंडाफोड़ किया है, उससे सूबे में योगी सरकार और केंद्र में मोदी सरकार का इकबाल एक बार फिर से बुलंद हुआ है। इस अप्रत्याशित कार्रवाई ने एक बात साफ कर दी है कि शासन ने अपने अधिकारियों को इस बात की खुली छूट दे रखी है कि गलत कामधंधा करने वाला व्यक्ति चाहे कितना भी राजनीतिक रसूख रखता हो, लेकिन उसे कतई बख्शा नहीं जाए।

बता दें कि मुंबई और दिल्ली की तर्ज पर महानगर गाजियाबाद में भी कई गोरखधंधे को अंजाम देने-दिलाने वाला गिरोह सक्रिय है, जो अपनी राजनीतिक पहुंच और स्थानीय प्रशासन से सांठगांठ के बल पर अपने गलत मंसूबों को अंजाम देता आया है। लेकिन जब तथ्य के साथ बात उच्च अधिकारियों तक पहुंचती है तो फिर कार्रवाई होने में देर भी नहीं लगती।

अंडरवर्ल्ड सूत्र बताते हैं कि स्थानीय होटल्स, रेस्टोरेंट, बार, हाई-फाई ब्यूटी पार्लर व यूनिसेक्स सैलून, जिम, फार्म हाउस, कॉल सेंटर्स आदि की आड़ में विदेशी धन्नासेठ स्थानीय लोगों के मार्फ़त मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और हाई प्रोफाइल वैश्यावृत्ति के राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय धंधे को अंजाम देने-दिलवाने के लिए जगह-जगह पर छोटी-बड़ी पार्टियों का आयोजन करते हैं, जिसमें लोकल रसूखदार लोगों को तरह-तरह से उपकृत करते हैं, और फिर उन्हीं की मदद से अपने हर गलत मंसूबों को अंजाम देते रहते हैं। ये सारे काम इतनी सफाई पूर्वक किये जाते हैं कि पुलिस के लिए शक करने की कोई वजह ही नहीं छोड़ी जाती।

खैर, जब तक पुलिस इन बातों की समझ पाती है, तबतक ये अपना काम कर चुके होते हैं। ये अपने धंधे में इतने सिद्धहस्त हो चुके होते हैं कि पुलिस की दो-चार छापेमारी या खुलासा से इनकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता। क्योंकि ये काम और मनमाफिक दाम की थ्योरी पर चलते हैं, जिससे नए ठिकाने इन्हें जल्दी मिल जाते हैं। कम्पनीज या व्यक्तिगत पार्टियों के बहाने चांदी के जूते मारने की इनकी कला इतनी नायाब है कि बहुत सारे जिम्मेदार अधिकारी-पदाधिकारी लोग भी यह नहीं समझ पाते हैं कि आखिर ये सब कैसे हो गया और अब आगे इससे बचने का क्या रास्ता है? लेकिन कहा गया है कि चोरी, हत्या, पाप को लाख छिपाओ, लेकिन वह छिपता कहाँ है? मौजूदा वाकया भी उसी का एक बानगी भर बताया जा रहा है। टीएचए, गाजियाबाद शहर व उसके बाहरी इलाकों में पुलिस की छापेमारी या कार्रवाई की एक लंबी फेहरिस्त है, लेकिन वह ऐसे कुकृत्य करने वाले की मनोबल क्यों नहीं तोड़ पाती है, यह शोध-अनुसंधान का विषय है।

सच कहा जाए तो पुलिस यदि इस मामले और इसी तरह के अन्य मामलों की तह में जाएगी तो महानगर भाजपा और जिला भाजपा संगठन से जुड़े कई घाघ व सफेदपोश चेहरे भी बेनकाब हो जाएंगे, क्योंकि उनके शह के बिना कोई छोटा-मोटा नेता ऐसे सब कार्यों में हाथ डालने की हिम्मत कर ही नहीं सकता है। महानगर भाजपा का एक जिम्मेदार नेता तो इतना बदनाम हो चुका है कि उनका एक जिम्मेदारी भरे पद पर टिके रहना इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि कहीं न कहीं लखनऊ और दिल्ली के कुछ पार्टी नेताओं की भी इसमें मिलीभगत है, अन्यथा भगवा किले में न तो बात इतनी बिगड़ती और न ही पार्टी विद डिफरेंस समझी जाने वाली बीजेपी की इतनी किरकिरी होती। लगता है कि सपा-बसपा से आये नेताओं ने अपने रंग में बीजेपी को रंगने की भी कसम खा रखी है।

Box-1 # पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद की कार्रवाई से लोकल बीजेपी नेताओं में मचा हड़कंप, अगली बारी किसकी आएगी, इंतजार करना रहेगा दिलचस्प

बता दें कि कमिश्नरेट गाजियाबाद पुलिस टीम द्वारा अवैध रूप से संचालित बार पर गत 15 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन ही कार्यवाही की गई। पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, कमिश्नरेट गाजियाबाद पुलिस टीम को एक सूचना प्राप्त हुयी थी कि आरडीसी कविनगर क्षेत्र में द फूड वर्कशाप में चौथे व पांचवें तल पर स्थित ताशा रेस्टोरेन्ट में बिना किसी लाइसेन्स के अवैध रूप से शराब का सेवन कराया जा रहा है तथा बिना किसी अनुमति के बार डांस प्रोग्राम का आयोजन किया जा रहा है। जिस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए कमिश्नरेट गाजियाबाद पुलिस टीम द्वारा आबकारी विभाग गाजियाबाद की टीम को साथ लेकर कार्यवाही करते हुए उक्त रेस्टोरेन्ट में छापा मारा गया तो मौके पर बिना किसी लाइसेन्स के अवैध रूप से शराब का सेवन कराया जा रहा था तथा बिना किसी अनुमति के डांस प्रोग्राम का आयोजन करना पाया गया। जो वर्तमान में लागू धारा 144 भादवि का उल्लंघन है। मौके से परोसी गयी शराब की खाली व भरी बोतलें बरामद की गयीं। उक्त के सम्बन्ध में थाना कविनगर गाजियाबाद में रेस्टोरेन्ट संचालक संयम कोहली के विरुद्ध मु.अ.सं. 48/23 धारा 60 आबकारी अधि. व 188 भादवि पंजीकृत कर आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है।

अभियुक्त का नाम संयम कोहली पुत्र श्याम कोहली है, जो पटेल नगर सिहानीगेट गाजियाबाद उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। अभियुक्त का आपराधिक इतिहास भी है। पहला, 1692/20 धारा 506/427 भादवि थाना कविनगर कमिश्नरेट गाजियाबाद।दूसरा, 0802/22 धारा 406/420/504/506 भादवि थाना सिहानीगेट कमिश्नरेट गाजियाबाद। तीसरा, 48/23 धारा 60 आबकारी अधि0 व 188 भादवि थाना कविनगर कमिश्नरेट गाजियाबाद।
पुलिस ने बरामदगी का विवरण देते हुए बताया कि अंग्रेजी शराब दो बोतल भरी हुयी और 2 खुली हुयी बोतल पाई गई। जबकि अंग्रेजी शराब की सात बोतल खाली भी मिली।

सूत्र बताते हैं कि संयम कोहली भाजयुमो महानगर का कोषाध्यक्ष है, जो कि एक जिम्मेदारी भरा पद है।
बता दें कि मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश हैं। उन्होंने अधीनस्थ अधिकारियों को कह रखा है कि ऐसे मामलों में कार्रवाई में किसी तरह की कोई कोताही न बरती जाए। यही वजह है कि इसे रोकने के लिए आबकारी विभाग एवं पुलिस संयुक्त रूप से जगह-जगह पर कार्रवाई भी कर रही है। बताया गया है कि प्रदेश शासन एवं आबकारी आयुक्त के आदेश पर जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह एवं पुलिस कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा के निर्देशन में जिले में अवैध शराब के निर्माण, बिक्री एवं परिवहन पर रोक लगाने के लिए लगातार चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। जिला आबकारी अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने बताया कि अवैध शराब के कारोबार को लेकर आबकारी निरीक्षकों द्वारा लगातार चेकिंग एवं दबिश की कार्रवाई की जा रही है।

इसी क्रम में रविवार को किसी स्रोत से यह शिकायत मिली कि आरडीसी के सी ब्लॉक में ताशा नाम से एक रेस्टोरेंट चल रहा है, जिसकी बिल्डिंग पर फूड वर्कशाप भी लिखा है। द फूड वर्कशॉप रेस्टोरेंट के चतुर्थ तल पर शराब पिलाई जा रही है। इसलिए प्राप्त सूचना पर फौरी कार्रवाई करते हुए आबकारी निरीक्षक आशीष पाण्डेय एवं दो थानों की फोर्स के साथ छापेमारी की कार्रवाई की गई।

दिलचस्प बात तो यह है कि जब रेस्टोरेंट की जांच की गई तो पता चला कि रेस्टोरेंट संचालक बिना लाइसेंस के अवैध रुप से शराब पिला रहा था। यही नहीं, मौके पर विदेशी बार बालाएं डांस करती हुई भी पाई गईं, जिसका फोटो व वीडियो दोनों वायरल हो चुके हैं। मौके पर छापामारी करने वाली टीम को बैलेनटाइन फिनेस्ट स्कॉच व्हिस्की की बोतल में 500 एमएल शराब, जागर्मेस्टर व्हिस्की की बोतल में 650 एमलएल शराब परोसते हुए पाई गई। वहीं, मौके से सिमरन ऑफ वोडका एवं ईगल चारों सिल्वर टकीला की एक-एक खाली बोतल, जेम्सन विहस्की की दो खाली बोतल, जोहनी वाल्कर, ब्लैक लेवल विहस्की की 3 खाली बोतल बरामद किया गया। रेस्टोरेंट संचालक संयम कोहती पुत्र श्याल लाल के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज कराया गया। आबकारी विभाग ने रेस्टोरेंट से शराब की कई भरी हुई बोतलों समेत अन्य सामान बरामद किया है जिसके आधार पर रेस्टोरेंट संचालक संगम कोहली व अन्य के खिलाफ आबकारी विभाग ने शिकायत दी और थाना कविनगर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आगे की नबीन शुरू कर दी है।

बता दें कि पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद की ताजा कार्रवाई से लोकल बीजेपी नेताओं में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, लोग इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि अगली बारी किसकी आएगी, इंतजार करना दिलचस्प रहेगा।

Box- 2 # सत्ता के रसूख के चलते पिछले 2 सालों से निर्बाध रूप से चलता रहा यह गोरखधंधा, पर किसी को नहीं लग सकी इसकी भनक

बताया जाता है कि गाजियाबाद के पॉश एरिया आरडीसी, राजनगर में सत्ताधारी दल से जुड़ा युवा नेता संयम कोहली अपने रेस्टोरेंट की आड़ में खुलेआम अवैध रूप से शराब परोस रहा था। लेकिन उस पर कार्रवाई करने से पुलिस अब तक क्यों बचती रही, समझना मुश्किल नहीं है। भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि उक्त सत्ताधारी नेता यह अवैध कार्य पिछले काफी समय से कर रहा था। इस मामले में जब भी कोई पुलिस से शिकायत करता तो पुलिस भी कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति भर कर देती थी। लेकिन हाल ही में जैसे ही इस बात की भनक आबकारी विभाग को लगी तो आबकारी विभाग की टीम ने छापेमारी की कार्रवाई कर रेस्टोरेंट से अवैध शराब व खाली बोतल बरामद कर आरोपी के खिलाफ कविनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। इसमें उसने दो पुलिस थानों का भी सहयोग लिया, ताकि छापेमारी में कोई बाधा नहीं आए।

इस तरह से देखा जाए तो जिला आबकारी अधिकारी राकेश कुमार सिंह की इस कार्रवाई से यह तो बिल्कुल साफ हो गया कि अवैध शराब के कारोबार में लिप्त चाहे कोई भी व्यक्ति हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। अब वह चाहें रसूखदार हो या फिर सत्ताधारी दल का नेता हो, सबके खिलाफ सख्त कार्रवाई नियम के अनुसार ही की जाएगी।

सवाल है कि आरडीसी राजनगर में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के महानगर कोषाध्यक्ष संयम कोहली अपने रेस्टोरेंट में बिना लाइसेंस के शराब पिलाने का काम आखिर क्यों और कैसे कर रहे थे। हैरतअंगेज बात यह है कि रेस्टोरेंट की आड़ में वहां पर खाना खाने आने वाले लोगों के लिए शराब पीने की व्यवस्था तो थी ही, उसके साथ ही उनके मनोरंजन के लिए बार बालाएं भी नाचती रहती थी। स्वाभाविक है कि जब यह सब कुछ धड़ल्ले से हो रहा था तो फिर बार बालाओं से मोबाइल नम्बर का आदान-प्रदान हुआ था या नहीं, यह पुलिस जांच का विषय है। ऐसा करके वह सभ्य वैश्यावृत्ति के धंधे का भी भंडाफोड़ कर सकती है।

बता दें कि बार या फिर रेस्टोरेंट में शराब पिलाने के लिए संचालक को आबकारी विभाग से लाइसेंस लेना अनिवार्य है। लेकिन सत्ता का रौब कहें या फिर ऊंची पहुंच, जिसके चलते संयम कोहली ने आबकारी विभाग से लाइसेंस लेना जरुरी नहीं समझा। बहरहाल देर से ही सही, लेकिन कार्रवाई तो हुई। चर्चा है कि उक्त रेस्टोरेंट में कई भाजपा नेता भी खाना खाने और अपने रंगीन शौकों को पूरा करने के लिए आते-जाते थे।

वहीं, रविवार को उक्त रेस्टोरेंट में एक दंपत्ति खाना खाने गए थे। खाने के दौरान उन्होंने देखा कि वहीं पास में कुछ लोग खुलेआम शराब पी रहे हैं और बार बालाएं नृत्य कर रही हैं। जिसका उन्होंने वीडियो भी बना लिया और कर्मचारियों से पूछा कि यह रेस्टोरेंट है या फिर बार है, जहां लोग खुलेआम शराब पी रहे है। क्योंकि महानगर के फैमिली रेस्टोरेंट में अक्सर लोग परिवार के साथ खाना खाने जाते हैं। लेकिन ऐसे माहौल से बच्चों और परिवार पर इसका गलत असर पड़ता है।

यही वजह है कि सम्बन्धित महिला ने उक्त वीडियो की शिकायत आबकारी विभाग एवं क्षेत्रीय पुलिस से की। समझा जाता है कि महिला ने जब उक्त रेस्टोरेंट में शराब पी रहे लोगों की और बार बालाओं के नृत्य की वीडियो बनाई तो इसकी भनक कर्मचारी तक को भी नहीं लगी। क्योंकि अगर कर्मचारियों को इसकी भनक लग जाती तो फिर यह कार्रवाई संभव नहीं हो पाती।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, बस एक शिकायत ने भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर कोषाध्यक्ष संयम कोहली का सारा गुरुर तोड़कर रख दिया। वहीं, बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, संयम कोहली पिछले करीब दो वर्षों से भाजयुमो के महानगर कोषाध्यक्ष है। इससे पूर्व वह अपना कारोबार करते थे। शायद उन्होंने अपने कार्यों को अंजाम देने के लिए भाजपा की सदस्यता ली। जब भाजयुमो के महानगर कोषाध्यक्ष बने तो रेस्टोरेंट की आड़ में अवैध रुप से शराब परोसने का काम भी शुरु कर दिया। क्योंकि भाजपा में होने के बाद उन पर जल्दी से पुलिस या फिर प्रशासन कार्रवाई नहीं कर पाएगा।

बताया जाता है कि पूर्व में जब भी किसी ने पुलिस से शिकायत की तो उसकी सूचना पहले ही उस तक पहुंच जाती थी। इसलिए जब पुलिस मौके पर जांच करने पहुंचती थी तो शराब की बोतल को पहले ही हटा दिया जाता था, और बार बालाओं को कर्मचारी के वेश में अलग कर दिया जाता था, जिस कारण आज तक कार्रवाई नहीं हुई, या फिर यूं कहा जाए कि स्थानीय पुलिस चौकी की इतनी मेहरबानी रही, जिसके चलते यह अवैध कार्य चल रहा था, जिसपर ताजा कार्रवाई से लगाम लगी है।

Box-3 # ….और अपनी साख बचाने के लिए भाजयुमो ने अपने कोषाध्यक्ष को निष्काषित किया

अपने रेस्टोरेंट को अपंजीकृत बार में तब्दील कर देने और रंगरेलियां उड़वाने वाले भाजपा युवा मोर्चा महानगर कोषाध्यक्ष संयम कोहली पर आखिर गाज गिर ही गई। खबर है कि भाजयुमो महानगर अध्यक्ष सचिन डेढ़ा ने अपने विवादास्पद कोषाध्यक्ष को अपने संगठन से निष्कासित कर दिया है, ताकि इस मामले में बीजेपी की जो किरकिरी पिछले दो दिनों से मीडिया व जनता के बीच हो रही है, उससे बचा जा सके। लेकिन सवाल फिर यही कि पार्टी विद डिफरेंस समझी जाने वाली भाजपा की अनुषांगिक इकाई में ऐसे लोगों को प्रवेश दिलवाने वाले और राजनीतिक संरक्षण देने वाले नेताओं पर कार्रवाई कब होगी, यह सवाल पार्टी के गलियारे में गूंज रहा है। पार्टी के कुछ उपेक्षित कार्यकर्ताओं ने बताया कि कुछ ईमानदार नेता ही ऐसे गलत लोगों को पार्टी में शह देते-दिलवाते हैं, क्योंकि ऐसी मोटी कमाई करने वाले लोग ही उनका व उनके कार्यक्रमों का वित्तपोषण करते हैं। इसलिए ऐसे लोगों की शिनाख्त करके उन्हें पार्टी से बाहर निकाला जाए, अन्यथा बीजेपी के कमल को भी जनमानस में मुरझाते देर नहीं लगेगी।

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