सच्ची मित्रता का उदाहरण है श्री कृष्ण सुदामा की मित्रता : आचार्य श्री महेश चंद्र पांडे

नई दिल्ली। श्री कृष्ण की अद्भुत लीलाओं का  गुणगान श्री सुखदेव जी से राजा परीक्षित ने सात दिन और रात सुना था परीक्षित ने मुनि सुखदेव से कहा जिनकी मृत्यु सात दिन बाद होनी है। उसे क्या करना चाहिए सुखदेव जी कहते हैं राजा परीक्षित मनुष्य को भगवान नाम संकीर्तन और भगवान की लीलाओं का गुणगान ही करना चाहिए।
नाम संकीर्तन ही सर्व पापो का नाश करने वाला है इसीलिए निरंतर हरि नाम संकीर्तन का चिंतन करना चाहिए श्रीमद् भागवत कथा के अंतर्गत सप्तम दिवस की कथा में भगवान श्रीकृष्ण का रुक्मणी से विवाह के बाद सत्यभामा, जामवंती, मित्रवृंदा अन्य 16 हजार रानियां के साथ हुआ प्रत्येक रानी से 10 पुत्र और एक पुत्री का जन्म हुआ, आगे चलकर सुखदेव जी बताते हैं भगवान श्रीकृष्ण के मित्र सुदामा का द्वारका में आगमन हुआ व्यास पीठ से आचार्य श्री महेश चंद्र पांडे जी कहते हैं सच्ची मित्रता का उदाहरण है।
श्री कृष्ण सुदामा की मित्रता भगवान श्री कृष्ण के मित्र सुदामा गरीब थे श्री कृष्ण सुदामा की मित्रता के विषय में बताते हुए कहा गुरुकुल में कृष्ण और सुदामा ने साथ में मुनि संदीपनी के यहां शिक्षा ग्रहण की। सुदामा की पत्नी सुशीला ने जब भगवान से मिलने के लिए कहा तब सुदामा जी श्री कृष्ण दर्शनों की लालसा लिए हुए द्वारकापुरी आए।  श्री कृष्ण के लिए भेंट स्वरूप सुदामा जी की पत्नी सुशीला ने तंदुल दिए लेकिन द्वारका के वैभव को देखते हुए सुदामा ने उसे छुपा लिया। श्री कृष्ण ने सुदामा के मन की जान ली और छीन कर तंदुल खा लिए और वरदान स्वरुप दो लोक का राज्य सुदामा को दान कर दिया। तीसरी मुट्ठी पर रुक्मणी ने भगवान को रोक दिया श्री कृष्ण ने सुदामा का भव्य स्वागत कर मित्रता की मिसाल दी। आगे चलकर कथा में दत्तात्रेय जी का प्रसंग दत्तात्रेय जी ने 24 गुरु की महिमा का वर्णन आदि लीला के बाद श्री कृष्ण का अपने श्रीधामगमन का विस्तार से वर्णन श्रीमद् भागवत कथा के सप्तम दिवस के अवसर पर श्री बांके बिहारी मंदिर श्रीधाम वृंदावन से सेवायत श्री करण कृष्ण गोस्वामी ने पधारकर श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण किया। रविंद्र गुप्ता द्वारा श्री करण कृष्ण गोस्वामी का पटका माला पहनाकर स्वागत किया गया। करण कृष्ण गोस्वामी द्वारा व्यसाचार्य को श्री बांके बिहारी की चित्रपट देकर सम्मानित किया। 
इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु जन उपस्थित होकर श्रीमद् भागवत कथा का आनंद लेते रहे। भक्तजन भजनों पर जमकर नाचे आरती के बाद सब प्रसाद लेकर अपने-अपने घर के लिए पधारे। इस अवसर पर समस्त गुप्ता परिवार ने सभी का स्वागत कर आनंद लिया।

Related Posts

Scroll to Top